विद्या भारती द्वारा निर्धारित सत्र 2024-25 हेतु वार्षिक संस्कृत गीत

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  • Create Date February 26, 2024
  • Last Updated February 26, 2024

विद्या भारती द्वारा निर्धारित सत्र 2024-25 हेतु वार्षिक संस्कृत गीत

विद्याभारतीशिक्षावीणा, गुजित लोके निरन्तरा।
प्राचीनैषा तदपि नवीना, विश्वगुरोर्या परम्परा।।
1. ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽभिज्ञानमयो निज इतिहासः।
परमोत्कर्षिणी परम्परा या निदिध्यासने विश्वासः।।
सदा विजेत्री भारतमातुः गु॰िजतगीतास्वरमुखरा।
विद्याभारतीशिक्षावीणा, गु॰िजत लोके निरन्तरा।
प्राचीनैषा तदपि नवीना.....................।।
2. राष्ट्रसमर्पित सर्वस्वं मे, सेवाभावो हृदयेऽस्मिन्।
जीवनमूल्याधृतां सुशिक्षां, प्रसारयामि राष्ट्रेऽस्मिन्।।
एवं व्रतं सुस्थिरं कृत्वा कार्यार्थे स्यात् गतित्वरा।
विद्याभारतीशिक्षावीणा, गु॰िजत लोके निरन्तरा।
प्राचीनैषा तदपि नवीना.....................।।
3. विश्वमिदं मम बृहत्कुटुम्बं, माताभूमिर्भावनया।
परमसुशीलं धारयाम्यहं, जगद्विनम्रः कामनया।
संस्कृतिगौरवमयं चरित्रं, समरसकत्र्री कृतिरूचिरा।
विद्याभारतीशिक्षावीणा, गु॰िजत लोके निरन्तरा।
प्राचीनैषा तदपि नवीना.....................।।